लेखक- प्रो. अमित कुमार शर्मा, समाजशास्त्र विभाग, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, रचनाकाल- 2011
बौद्ध धर्म
बौद्ध धर्म भारत में छठी सदी ईसा पूर्व हुए नवधार्मिक आंदोलन की प्रतिष्ठित परिणति है। इसके मूल में भारत का पारंपरिक धर्म है। इसका अस्तित्व गौतम बुद्ध के उपदेशों पर आधारित है। भगवान बुद्ध ने स्वयं घोषणा की थी कि वे कोई नया धर्म नहीं दे रहे हैं। उन्होंने केवल एक नया मार्ग दिया। पहले से उपलब्ध वैदिक और श्रमण परंपराओं के बीच एक पुल बनाया। एक नई व्यवस्था दी। सनातन धर्म को एक नया स्वरूप एक नई पद्धति एवं कुछ नई तकनीक दी। कलिकाल में सनातन धर्म के तीन शलाका पुरुष हैं- भगवान श्रीकृष्ण, भगवान महावीर एवं भगवान बुद्ध। यूरोपीय विद्वान हीगेल की भाषा में बात करें, तब भगवान श्रीकृष्ण का श्रीमद्भगवद्गीता में वर्णित उपदेश ‘स्थापना’ (थीसिस) है,
भगवान महावीर का जिन-सूत्र में वर्णित उपदेश ‘प्रतिेस्थापना’ (एंटी-थीसिस) है और भगवान बुद्ध का धम्मपद एवं जातक-कथाओं में वर्णित उपदेश ‘पुनर्स्थापना’ (सिंथेसिस) है। कुमारस्वामी ‘पुनर्स्थापना’ को पुनर्रचना (रिमेनिफेस्टेसन) कहते थे। हजारी प्रसाद द्विवेदी का प्रियशब्द ‘पुनर्नवता’ थी।
बौद्ध मत की घोषणा को त्रि-आश्रय या तीन रत्न के रूप में जाना जाता है, जिसमें बुद्ध, धम्म व संघ आते हैं। बुद्ध एक बोधिसत्त्व प्राप्त शिक्षक (उपदेशक) हैं। कोई भी इन तीन आश्रयों को तीन बार उच्चारित करके बौद्ध बन सकता है, उदाहरणस्वरूप मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ (बुद्धं शरणं गच्छामि), मैं धम्म की शरण में जाता हूँ (धम्मं शरणं गच्छामि), मैं संघ की शरण में जाता हूँ (संघम् शरणं गच्छामि)।
धम्म के चार अर्थ हैं :-
(1) परम सत्य,
(2) सम्यक आचरण
(3) धर्म सिद्धांत
(4) अनुभव का अनंत स्वरूप।
प्रथम तीन अर्थों को हिन्दू धर्म में देखा जाता है, लेकिन चौथा बौद्ध धर्म की विशिष्टता है। सनातन धर्म की नई अभिव्यक्ति है।
बौद्ध धर्म के अनुयायी गौतम बुद्ध के बताए चार महान सत्यों में विश्वास करते हैं। पहले के अनुसार संसार में ‘दुःख’ व्याप्त है। दूसरा दुःख का कारण (तृष्णा) बताता है। तीसरे महान सत्य के अनुसार दुःख के कारण को दूर किया जा सकता है। इन कारणों को दूर करने के लिए विस्तृत उपायों की व्याख्या चतुर्थ महान सत्य में मिलती है।
बौद्ध धर्म में अष्टांगिक मार्ग की विवेचना की गई है, जिसमें सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक्, सम्यक कर्म, सम्यक जीविका, सम्यक प्रयत्न, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि आते हैं। ये अष्ट मार्ग निर्वाण की तरफ ले जाते हैं, जिससे सभी दुःखओं से मुक्ति मिलती है। चार महान सत्य एवं अष्ट मार्ग निर्देशक तत्त्व हैं ।
बौद्ध धर्म के मुख्य ग्रंथों में ‘विनय पिटक’ (अनुशासन की व्याख्या), ‘सुत्त पिटक’ (उपदेशों की व्याख्या) और ‘अभिधम्म पिटक’ (धर्मनीतियों की व्याख्या) हैं।
बौद्ध धर्म के चार प्रमुख स्वरूप हैं
(क) स्थविरयान
(ख) महायान
(ग) वज्रयान या तंत्र
(घ) जेन।
भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में इसके विभिन्न स्वरूप प्रचलित हैं। भारत के बाहर बौद्ध धर्म का प्रभाव तिब्बत, श्रीलंका, जापान, कोरिया, थाईलैंड, कंबोडिया, यूरोपीय संघ एवं संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में है।
भारत में सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध त्यौहार बुद्ध पूर्णिमा है। अनेक बौद्ध कुछ अन्य त्यौहार भी मनाते हैं। अनेक बौद्ध परिवारों द्वारा हिन्दू त्यौहार, जैसे- होली, दीपावली और मकर संक्रांति भी मनाए जाते हैं। बाबा साहब अंबेडकर बौद्ध धर्म को हिन्दू संस्कृति का विकास मानते थे।
